प्रस्तावना
भारत में प्राचीन समय से ही कई प्रकार के खेल खेले जाते हैं और देश का राष्ट्रीय खेल हॉकी को माना जाता है। विशेष रुप से, बच्चे खेलने के बहुत अधिक शौकीन होते हैं। वे आस-पास के क्षेत्र में, पार्कों, बगीचों में खेलते हैं। इसके साथ ही वह आमतौर पर स्कूलों में होने वाले खेलों में भी भागीदारी लेते हैं। स्कूल स्तर पर, जिला स्तर पर, राज्य स्तर पर, राष्ट्रीय स्तर पर और अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर देश के बच्चों और युवाओं की अधिकतम भागीदारी के लिए बहुत सी खेल गतिविधियों का आयोजन किया जाता है। यद्यपि, कभी-कभी राष्ट्रीय और अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर जैसे – ओलंपिक या कॉमनवेल्थ खेलों में खिलाड़ियों का खराब प्रदर्शन भारत में खिलाड़ियों के लिए अच्छी खेल सुविधाओं की कमी और अभाव को प्रदर्शित करता है।
इतिहास
प्राचीन यूनानी काल में कई तरह के खेलों की परंपरा स्थापित थी और ग्रीस की सैन्य संस्कृति और खेलों के विकास ने एक दूसरे को काफी प्रभावित किया। खेल उनकी संस्कृति का एक ऐसा प्रमुख अंग बन गया कि यूनान ने ओलिंपिक खेलों का आयोजन करना शुरु कर दिया, जो प्राचीन समय में हर चार साल पर पेलोपोनिस के एक छोटे से गाँव में ओलंपिया नाम से आयोजित किये जाते थे। खेल को पूर्ण व्यवस्थित रूप सर्वप्रथम यूनानियों ने ही दिया था। उनकी नागरिक व्यवस्था में खेल का महत्त्वपूर्ण स्थान था। उस युग में ओलिंपिक खेलों में विजय मनुष्य की सबसे बड़ी उपलब्धि समझी जाती थी। गीतकार उनकी प्रशंसा में गीत लिखते थे और कलाकार उनके चित्र तथा मूर्तियां बनाते थे।
भारतीय एथलीट अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर
अभी भी भारतीय एथलीट अन्तर्राष्ट्रीय स्तर के खेलों में मानक स्थिति को प्राप्त नहीं कर पाए हैं हालांकि, यह लगता है कि आने वाले समय में वे ऐसा कर पाएंगे क्योंकि वर्तमान सालों में खेलों का क्षेत्र बढ़ गया है। इसे देश की सरकार द्वारा स्कूल और कालेजों में बड़े स्तर पर बढ़ावा दिया जा रहा है। भारतीय एथलीट (खिलाड़ी) हर राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर के खेल में अपनी पूर्ण भागीदारी दिखा रहे हैं और लगातार गुणवत्ता और मानक हासिल करने के लिए कोशिश कर रहे हैं। भारतीय खिलाड़ियों ने पिछले ओलंपिक खेलों में बहुत कम स्वर्ण पदक जीते थे हालांकि, वे बहुत ही साहस और उत्साह के साथ खेले थे, जिसने दर्शकों को काफी उत्साहित किया। भारत हॉकी, कुश्ती, क्रिकेट, आदि कई खेलों में अग्रणी है।
खिलाड़ी का चुनाव
सबसे अच्छे खिलाड़ी का चुनाव उन विद्यार्थियों में से किया जाता है, जो स्कूली स्तर और राज्य स्तर पर बहुत अच्छा खेलते हैं। अब भारत में खेलों की स्थिति बदल गई है और यह लोकप्रियता और सफलता पाने का अच्छा क्षेत्र बन गया है। यह शिक्षा से अलग नहीं है और यह भी आवश्यक नहीं है कि, यदि कोई अच्छा खेल खेलता है, तो उसके लिए शिक्षा की आवश्यकता नहीं है या यदि कोई पढ़ने में अच्छा है तो खेलों में शामिल नहीं हो सकता। इसका अर्थ यह है कि कोई भी व्यक्ति खेलों में भाग ले सकता हैं, चाहे वह शिक्षित हो या अशिक्षित। शिक्षा और खेल एक ही सिक्के अर्थात् सफलता के दो पहलू हैं। विद्यार्थियों के लिए स्कूलों में खेल खेलना अनिवार्य कर दिया गया है, इसके साथ ही शिक्षकों और अभिभावकों को उनके स्तर पर उनके विकास और वृद्धि के साथ ही देश का भविष्य बनाने के लिए खेल खेलने के लिए भी प्रेरित करना चाहिए।
निष्कर्ष
खेल बहुत तरीकों से हमारे जीवन को पोषित करने का कारय करते हैं। ये हमें अनुशासन और अपने लक्ष्य को प्राप्त करने लिए निरंतर कार्य और अभ्यास करना सिखाते हैं। इसके साथ ही यह हमें शारीरिक और मानसिक दोनों तरीकों से स्वस्थ रखते हैं और इस प्रकार हम सामाजिक, भावनात्मक, मानसिक और बौद्धिक रूप से फिट रखते हैं। इस तरह के एक प्रदूषित और दबाव के माहौल में जहाँ हर कोई तनाव देने के लिए और एक दूसरे के लिए समस्या पैदा करने के लिए तैयार हो जाता है, ऐसे में खेल मनोरंजन और मन को एकाग्र करने का सबसे अच्छा तरीका है। यह एकाग्रता स्तर और स्मरण शक्ति को बढ़ाता है और मस्तिष्क को सकारात्मक विचारों से परिपूर्ण कर देता है।
टिप्पणियाँ
एक टिप्पणी भेजें